यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: मां को बचाने में इंजीनियर बेटे की मौत

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स्थान: Noida

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हाल ही में घटी एक अत्यंत दर्दनाक दुर्घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली से महोबा की ओर जा रही एक निजी स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके चलते नौ यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस भयावह हादसे में महोबा के चरखारी निवासी एक ही परिवार की मां और उनके इंजीनियर बेटे की भी मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्ट्स और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर यह पता चला है कि बेटे ने आग की लपटों के बीच अपनी मां को बचाने का असफल प्रयास किया था, जिसमें दोनों की दुखद मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद देश भर से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं और प्रशासनिक स्तर पर भी कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा बुधवार, तेरह सितंबर दो हजार छब्बीस की देर रात को हुआ। रात के ग्यारह बजकर बीस मिनट से ग्यारह बजकर तीस मिनट के बीच यह निजी स्लीपर बस ग्रेटर नोएडा के जेवर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत तैंतीसवें किलोमीटर माइलस्टोन के पास से गुजर रही थी। तभी अचानक बस के भीतर आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और बस कुछ ही पलों में आग के गोले में तब्दील हो गई। इस दुर्घटना में कुल नौ यात्रियों की जलने से या दम घुटने से मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका नजदीकी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस भीषण हादसे में महोबा जिले के चरखारी कस्बे के रहने वाले भाजपा जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस दुर्घटना में उनकी करीब पचास वर्षीय पत्नी सुनीता गुप्ता और उनके पच्चीस वर्षीय इकलौते इंजीनियर बेटे शशांक गुप्ता की जान चली गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, शशांक दिल्ली में एक निजी कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। उनकी मां पैर के दर्द से परेशान थीं, जिन्हें दिखाने के बाद शशांक उन्हें लेकर बस द्वारा महोबा वापस लौट रहे थे। जब बस में आग लगी, तो शशांक ने अपनी मां को बचाने की पूरी कोशिश की और कथित तौर पर अपनी जान की परवाह किए बिना आग के बीच कूद पड़े। हालांकि, आग की भयंकर लपटों और धुएं के आगोश में आने से दोनों की मौत हो गई। बाद में डीएनए परीक्षण और फोरेंसिक जांच के माध्यम से उनके हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। इस पूरी दुर्घटना के संबंध में यात्रियों और मृतकों के परिजनों द्वारा बस संचालक और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दर्ज कराई गई प्राथमिकी और बचे हुए यात्रियों के बयानों के मुताबिक, बस के केबिन से काफी समय से जलने की तेज बदबू आ रही थी। यात्रियों ने इस बात की शिकायत तुरंत बस के ड्राइवर और कंडक्टर से की थी। आरोप है कि बस स्टाफ ने यात्रियों की इस गंभीर चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोकने से साफ इनकार कर दिया। यदि समय रहते बस रोक दी जाती, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि को टाला जा सकता था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। आग लगने के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक और विस्तृत तकनीकी जांच चल रही है, लेकिन शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि बस के एयर कंडीशनिंग यानी एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट होने या स्पार्क उठने के कारण यह भीषण आग लगी होगी। इस दर्दनाक हादसे पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुर्घटना में हुई जानमाल की क्षति पर भारी दुख जताया है। प्रभावित परिवारों को संबल देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तुरंत आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा प्रशासन को यह भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर लंबी दूरी तय करने वाली निजी बसों में सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय सफर करने वाली इन बसों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यप्रणाली की जांच करना बेहद आवश्यक हो गया है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को अब इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के भयानक दर्द का सामना न करना पड़े।

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